तुम कह दो तो गीत लिखूँ मैं
अधरों पर संगीत लिखूँ मैं
पढ़ लो यदि नयनों की भाषा
नवल प्रीत की रीत लिखूँ मैं
तुम कह दो तो सिंचित कर दूं
जीवन का अभ्यारण सारा
पुलकित कर दूं मन उपवन को
सुरभित कर दूं ये जग सारा
तुम कह दो तो आस लिखूँ मैं साँसों में विश्वास लिखूँ मैं पढ़ लो यदि तुम मन की भाषा तृषित ह्रदय की प्यास लिखूँ मैं तुम कह दो तो अर्पित कर दूं प्रेम ह्रदय का तुम पर सारा सांस सांस अभिमंत्रित कर दूं पोर पोर चंदन वन सारा
तुम कह दो तो प्यार लिखूँ मैं दो हृदयों की हार लिखूँ मैं पढ़ लो यदि तुम तन की भाषा नयनों में अभिसार लिखूँ मै स्पन्दन हो "सरिता" इतना "प्रेम" ही((( प्रेम))) बार बार लिखुं मै...
तुम कह दो तो आस लिखूँ मैं साँसों में विश्वास लिखूँ मैं पढ़ लो यदि तुम मन की भाषा तृषित ह्रदय की प्यास लिखूँ मैं तुम कह दो तो अर्पित कर दूं प्रेम ह्रदय का तुम पर सारा सांस सांस अभिमंत्रित कर दूं पोर पोर चंदन वन सारा
तुम कह दो तो प्यार लिखूँ मैं दो हृदयों की हार लिखूँ मैं पढ़ लो यदि तुम तन की भाषा नयनों में अभिसार लिखूँ मै स्पन्दन हो "सरिता" इतना "प्रेम" ही((( प्रेम))) बार बार लिखुं मै...