Wednesday, 11 October 2017

तुम कह दो तो गीत लिखूँ मैं अधरों पर संगीत लिखूँ मैं पढ़ लो यदि नयनों की भाषा नवल प्रीत की रीत लिखूँ मैं तुम कह दो तो सिंचित कर दूं जीवन का अभ्यारण सारा पुलकित कर दूं मन उपवन को सुरभित कर दूं ये जग सारा

तुम कह दो तो आस लिखूँ मैं साँसों में विश्वास लिखूँ मैं पढ़ लो यदि तुम मन की भाषा तृषित ह्रदय की प्यास लिखूँ मैं तुम कह दो तो अर्पित कर दूं प्रेम ह्रदय का तुम पर सारा सांस सांस अभिमंत्रित कर दूं पोर पोर चंदन वन सारा

तुम कह दो तो प्यार लिखूँ मैं दो हृदयों की हार लिखूँ मैं पढ़ लो यदि तुम तन की भाषा नयनों में अभिसार लिखूँ मै स्पन्दन हो "सरिता" इतना "प्रेम" ही((( प्रेम))) बार बार लिखुं मै...

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